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उपभोक्ता मूल्य सूचकांक

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index)

इस लेख में हम उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर सरल और सहज चर्चा करेंगे एवं इसके विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने का प्रयास करेंगे, तो अच्छी तरह से समझने के लिए इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें;

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index या CPI) घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा खरीदे गये वस्तुओं एवं सेवाओं के औसत मूल्य को मापने वाला एक सूचकांक है।

दूसरे शब्दों में कहें तो CPI का इस्तेमाल आधार वर्ष के संदर्भ में कुछ चयनित वस्तुओं और सेवाओं के खुदरा मूल्यों (retail prices) में समय के साथ बदलाव को मापने के लिये किया जाता है, जिस पर एक परिभाषित उपभोक्ता समूह द्वारा अपनी आय खर्च की जाती है।

यहाँ पर आपके मन में सवाल आ सकता है कि आधार वर्ष की आवश्यकता क्यों पड़ती है? 

अगर हमें महंगाई मापना हो तो जाहिर है हमें पहले ये तो पता होना ही चाहिए कि पहले कितना मूल्य था और उसमें अब कितनी वृद्धि हुई है। इसीलिए एक आधार वर्ष तय कर दिया जाता है ताकि उसके आधार पर होने वाले परिवर्तन को मापा जा सकें। 

अभी की बात करें तो आधार वर्ष 2016 है जिसकी वैल्यू 100 है। यानी कि इस 100 में जितना परिवर्तन होगा उसी को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के रूप में मापा जाएगा। 

यहाँ ये याद रखने वाली बात है कि चूंकि आधार वर्ष को एक प्रतिनिधि वर्ष के रूप में माना जाता है, इसीलिए यह जरूरी है कि उस वर्ष किसी भी प्रकार की असामान्य घटना जैसे-सूखा, बाढ़, भूकंप आदि न हुई हो। 

नोट - उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की तरह ही एक थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index या WPI) भी होता है लेकिन इन दोनों में अंतर ये होता है कि थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में जहां उत्पादक स्तर पर मुद्रास्फीति (Inflation) की गणना की जाती है, वहीं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में उपभोक्ता के स्तर पर मुद्रास्फीति (Inflation) या कीमतों में होने वाले परिवर्तन को मापा जाता है।

इसीलिए यहाँ ये याद रखिए कि इस लेख में हम उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index या CPI) को समझ रहे हैं न कि थोक मूल्य सूचकांक को। 

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के प्रकार

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी कि CPI के चार निम्नलिखित प्रकार हैं:

1. औद्योगिक श्रमिकों के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW)
2. कृषि मज़दूर के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-AL) 
3. ग्रामीण मज़दूर के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-RL)
4. 
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (ग्रामीण/शहरी/संयुक्त)

इन चारों सूचकांकों में से प्रथम तीन को श्रम और रोज़गार मंत्रालय (Ministry of Labor and Employment) में श्रम ब्यूरो द्वारा संकलित किया जाता है, जबकि चौथे प्रकार के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा संकलित किया जाता है।

उपयोग

ख़ुदरा स्तर पर महँगाई या मुद्रास्फीति मापने के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के रूप में औद्योगिक श्रमिकों के लिये उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) जारी की जाती है। इसका उपयोग सरकारी कर्मचारियों और औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के महंगाई भत्ते को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।

- इसके अलावा इसका उपयोग नियोजित रोजगार में न्यूनतम मजदूरी के निर्धारण और संशोधन में भी किया जाता है।

1993 में, डी.टी. लकड़ावाला की अध्यक्षता में गरीबी आकलन के लिए गठित एक विशेषज्ञ समूह ने गरीबी रेखा के निर्धारण में शहरी क्षेत्रों में औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) और ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि श्रम के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-AL) का उपयोग करने की सिफ़ारिश की थी। [ज्यादा जानकारी के लिए भारत में गरीबी पढ़ें]

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