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महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना

महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना

इस लेख में हम महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना पर सरल और सहज चर्चा करेंगे एवं इसके विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने का प्रयास करेंगे, तो अच्छी तरह से समझने के लिया लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना

By Unknown author - Documentary, CC BY-SA 2.5 in, Link

महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना क्या है?

महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना, जिसे कि मनरेगा भी कहा जाता है; साल 2005 में एक अधिनियम (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारटी अधिनियम 2005) द्वारा लाया गया था। 

सरकार के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में परिवारों की आजीविका सुरक्षा में वृद्धि करना है। प्रत्येक परिवार का कोई वयस्क सदस्य, जो अकुशल कार्य करना चाहता है, एक वर्ष में कम से कम 100 दिन का वैतनिक रोजगार गारंटी से प्राप्त कर सकता है।

इसमें एक तिहाई भाग स्त्रियों का होता है। यह योजना वेतन रोजगार तो उपलब्ध कराती ही है साथ ही कार्य के माध्यम से प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को सुदृढ़ करती है। इसका मुख्य उद्देश्य दीर्घकालीन निर्धनता जैसे - सूखा, वनों का काटना और भूमि के कटाव के कारणों को दूर करना धारणीय विकास (sustainable development) को प्रोत्साहन देना है।

मनरेगा का मूल उद्देश्य क्या है?

मनरेगा का मूल उद्देश्य निम्नलिखित है;

(1) किसी भी परिवार के वयस्क सदस्य को साल में कम से कम 100 दिन अकुशल काम गारंटी के साथ उपलब्ध कराना।
(2) गरीबों के आजीवियका को सुदृढ़ करना।
(3) सक्रिय रूप से सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना।
(4) पंचायती राज व्यवस्था को और सुदृढ़ करना। 

मनरेगा का लक्ष्य क्या है?

- रोजगार के अवसर प्रदान कर गाँवों में रहने वाले उन लोगों को सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराना जो कि बहुत ही संवेदनशील है। 

- टिकाऊ और उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण करना। 

- प्राकृतिक संसाधनों को पुनर्जीवित करना। 

- सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों को खासकर के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के महिलाओं का सशक्तिकरण करना। 

- विभिन्न गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम और आजीविका पहलों के जरिये गैर-केन्द्रीय नियोजन को बढ़ावा देना। 

- पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करके लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत करना। 

इस योजना के हित धारक कौन-कौन है?

 इस योजना के मुख्य हितधारक निम्नलिखित है:

काम चाहने वाले मजदूर
ग्राम सभा 
त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थान
जिला कार्यक्रम समन्वयक
राज्य सरकार,
ग्रामीण विकास मंत्रालय,
सिविल सोसाइटी, आदि। 

मनरेगा में जॉब कार्ड क्या होता है?

मनरेगा के तहत पंजीकृत होने के बाद एक वैधानिक कार्ड मिलता है जिसे जॉब कार्ड कहा जाता है। मजदूरों को धोखा-धड़ी से बचाने और व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य  से जॉब कार्ड बनाया जाता है। 

For more information - Read this FAQs

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