Header Ads

wonderhindi ad

दीनदयाल अंत्योदय योजना

दीनदयाल अंत्योदय योजना

इस लेख में हम दीनदयाल अंत्योदय योजना पर सरल एवं सहज चर्चा करेंगे एवं इसके विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने का प्रयास करेंगे, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें। 

दीनदयाल अंत्योदय योजना

दीनदयाल अंत्योदय योजना क्या है?

दीनदयाल अंत्योदय योजना (Deen Dayal Antyodaya Yojana), कौशल विकास और अन्य उपायों के माध्यम से आजीविका या रोजगार के अवसरों में वृद्धि कर शहरी और ग्रामीण गरीबी को कम करने के उद्देश्य से बनाया गया है। 
कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत इसीलिए महसूस हुआ क्योंकि हमारे देश में बड़ी मात्रा में मानव संसाधन होते हुए भी उसे उचित कौशल न होने की वजह से रोजगार नहीं मिल पाता है। ऐसे में अगर कौशल युक्त लोगों की संख्या बढ़ता है तो सरकार की महत्वाकांक्षी कार्यक्रम मेक इन इंडिया को भी बूस्ट मिलेगा। 

दीनदयाल अंत्योदय योजना को समझने से पहले हमें इसके इतिहास को समझना होगा ताकि हम ये समझ सकें कि ये योजना कैसे लाया गया है। 

दीनदयाल अंत्योदय योजना की पृष्ठभूमि

इस योजना की शुरुआत स्वर्णजयंती रोजगार योजना (Goden Jubilee Employment Scheme) से मान सकते हैं। इसके तहत दो मुख्य योजनाएँ आती है –
(1) स्वर्णजयंती शहरी रोजगार योजना और
(2) स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना।


(1) स्वर्णजयंती शहरी रोजगार योजना – यह योजना 1 दिसंबर 1997 में लागू की गई है। उसका उद्देश्य शहरी बेरोजगार या अल्प रोजगार व्यक्तियों को स्वरोजगार, अथवा वेतन रोजगार के अवसर प्रदान करके लाभप्रद रोजगार उपलब्ध कराना है। शहरी क्षेत्रों मे पहले से चलायी जा रही तीन योजनाओं – नेहरू रोजगार योजना (NRY), गरीबों के लिए शहरी बुनियादी सेवाएं तथा प्रधानमंत्री एकीकृत शहरी गरीब उन्मूलन योजना को इसी नई योजना में शामिल कर दिया गया है।

आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिनांक 23 सितंबर, 2013 को मौजूदा स्‍वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना के स्‍थान पर राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (National Urban Livelihoods Mission) आरंभ किया। 2016 में इसका नाम बदलकर DAY-NULM यानी कि दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन कर दिया गया। हालांकि इस सब के बावजूद इसका उद्देश्य गरीबी को दूर करना ही रहा।

(2) स्वर्णजयंती ग्राम स्वरोजगार योजना – यह भी एक स्वरोजगार कार्यक्रम है। इसकी स्थापना अप्रैल, 1999 में की गई। वित्तीय वर्ष 2010-11 में इसका नाम बदलकर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (National Rural Livelihood Mission) कर दिया गया। 29 मार्च, 2016 से  इसका नाम बदल कर DAY-NRLM यानी कि दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कर दिया गया।

इतनी बार नाम बदलने के बावजूद भी इसके मूल उद्देश्य में कोई बदलाव नहीं आया है, जो कि है गरीबी दूर करना। इसके तहत ग्रामीण निर्धनों को स्वयं सहायता समूहों का हिस्सा बनाया जाता है और उनकी क्षमता का निर्माण, प्रशिक्षण और कौशल के विकास के माध्यम से किया जाता है। साथ ही इसका ग्रामीण निर्धन परिवारों को बैंक तथा सरकारी आर्थिक सहायता के मिले-जुले माध्यम से आय सृजन की परिसंपत्तियाँ उपलब्ध कराकर, निर्धनता रेखा से ऊपर उठाने की कोशिश की जाती है।

कुल मिलाकर दीनदयाल अंत्योदय योजना और कुछ नहीं बल्कि पहले से चल रही राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का परिवर्तित रूप है या उसी का एकीकरण है। आइये अब आगे इस योजना के बारे में समझते हैं। 

दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन का लक्ष्य

इस योजना का लक्ष्य शहरी गरीब परिवारों के गरीबी को कम करने के लिए उन्हें फायदेमंद स्व-रोजगार और उचित मजदूरी के अवसर का उपयोग करने में सक्षम करना, ताकि उसकी आजीविका में स्थायी आधार पर सुधार हो सके। 
इस योजना का दूसरा लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से शहरी बेघरों को आवश्यक सेवाओं से युक्त आश्रय प्रदान करना भी है। 
इसके साथ ही यह योजना शहरों में सड़क पर समान बेचने वालों की आजीविका संबंधी समस्याओं को दूर करने हेतु संस्थागत ऋण और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने से भी संबंधित है। 

दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन की मुख्य विशेषताएँ

  • कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार - इस योजना के तहत शहरी गरीबों को कुशल बनाने के लिए 15 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है, पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर के लिए प्रति व्यक्ति ये 18 हजार रुपये है। 
  • सामजिक एकजुटता और विकास - इसके तहत सदस्यों का प्रशिक्षण स्वयं सहायता समूह के गठन के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक समूह को 10,000 रुपये का प्रारंभिक समर्थन दिया जाता है। वहीं पंजीकृत क्षेत्रों के स्तर महासंघों को 50, 000 रुपये की सहायता प्रदान की जाती है।
  • शहरी गरीबों के लिए सब्सिडी - सूक्ष्म उद्यमों और समूह उद्यमों की स्थापना के जरिए स्व-रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके तहत व्यक्तिगत परियोजनाओं के लिए 2 लाख रुपयों की ब्याज सब्सिडी औऱ समूह उद्यमों पर 10 लाख रुपयों की ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी।
  • शहरी बेघरों के लिए आश्रय - शहरी बेघरों के लिए आश्रयों के निर्माण की लागत योजना के तहत पूरी तरह से वित्त पोषित है।
  • अन्य विशेषताएँ - बुनियादी ढांचे की स्थापना के माध्यम से विक्रेताओं के लिए विक्रेता बाजार का विकास और कूड़ा उठाने वालों एवं विकलांगजनों आदि के लिए विशेष परियोजनाएं।

दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन

जैसा कि हमने ऊपर भी बात की है, स्वर्णजयंती ग्राम स्व-रोजगार योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 1999 में शुरू किया गया था और इसे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के रूप में वित्तीय वर्ष 2010-11 में पुनर्गठित किया गया था। 


इसी को साल 2016 में दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत ला दिया गया और इसीलिए अब इसे DAY NRLM या दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कहा जाता है। 

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का उद्देश्य 

गरीब परिवारों या अकुशल मजदूरों को लाभकारी स्व-रोजगार और कुशल मजदूरी रोजगार के अवसरों तक पहुंचने में सक्षम बनाकर गरीबी को कम करना, ताकि स्थायी आधार पर उनकी आजीविका में सुधार हो।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (1) राज्यों को आजीविका आधारित गरीबी कम करने की कार्य योजना (Action Plan) तैयार करने में सक्षम बनाता है, (2) निरंतर क्षमता निर्माण (Capicity Building) एवं अपेक्षित कौशल प्रदान कर लोगों के लिए आजीविका के अवसरों के साथ संबंध बनाना, और (3) गरीबी परिणामों के लक्ष्यों के खिलाफ निगरानी करना। 

इस योजना के तहत प्रत्येक चिन्हित ग्रामीण गरीब परिवार से कम से कम एक महिला सदस्य को समयबद्ध तरीके से स्वयं सहायता समूह नेटवर्क के तहत लाया जाना है। विशेष रूप से कमजोर समुदायों जैसे हाथ से मैला उठाने वाले, मानव तस्करी के शिकार, विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह, विकलांग व्यक्ति और बंधुआ मजदूर पर विशेष जोर दिया जाता है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की विशेषताएँ 

यह योजना वित्तीय समावेशन की मांग और आपूर्ति दोनों पक्षों पर काम करता है। मांग पक्ष पर, यह गरीबों के बीच वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देता है और स्वयं सहायता समूहों और उनके संघों को उत्प्रेरक पूंजी प्रदान करता है। आपूर्ति पक्ष पर, मिशन वित्तीय क्षेत्र के साथ समन्वय करता है और सूचना, संचार और प्रौद्योगिकी आधारित वित्तीय प्रौद्योगिकियों, व्यापार संवाददाताओं और 'बैंक मित्र' जैसे सामुदायिक सुविधाकर्ताओं के उपयोग को प्रोत्साहित करता है। 

यह जीवन, स्वास्थ्य और संपत्ति के नुकसान के जोखिम के खिलाफ ग्रामीण गरीबों के सार्वभौमिक कवरेज की दिशा में भी काम करता है। इसके अलावा, यह प्रेषण पर काम करता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां प्रवासन स्थानिक है।

- यह योजना अपने तीन स्तंभों के माध्यम से गरीबों के मौजूदा आजीविका पोर्टफोलियो को स्थिर और बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करता है - 

'आजीविका में वृद्धि' मौजूदा आजीविका विकल्पों को बढ़ाने और विस्तारित करने और कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में नए अवसरों का दोहन करने के माध्यम से;
'रोजगार' - बाहर नौकरी बाजार के लिए कौशल निर्माण; और
'उद्यम' - स्वरोजगार और उद्यमियों का पोषण (सूक्ष्म उद्यमों के लिए)।

ये समूह अपने सदस्यों को व्यक्तिगत सदस्यों/परिवारों को अपने स्वयं सहायता समूहों और संघों के माध्यम से आजीविका ज्ञान, कौशल, प्रौद्योगिकी, बाजार आसूचना, जोखिम प्रबंधन उत्पादों और ऋण सहायता तक पहुंच प्रदान करते हैं।

ज्यादा जानकारी के लिए - https://aajeevika.gov.in/en 
दीनदयाल उपाध्याय

नीचे कुछ अन्य लेखों का लिंक दिया हुआ है उसे भी अवश्य पढ़ें। 

लैंगिक भेदभाव
मधुबनी चित्रकला
बेरोजगारी
बेरोजगारी के प्रकार
शिक्षित बेरोजगारी
बेरोजगारी के दुष्परिणाम
बेरोज़गारी निवारण के उपाय
जनसंख्या समस्या, उसका प्रभाव एवं समाधान
झंडे फहराने के सारे नियम-कानून
शिक्षा क्या है?: 
भारतीय संघ एवं इसका क्षेत्र 
बेरुबाड़ी मामला क्या है?
संविधान निर्माण की कहानी
भारतीय राज्यों के बनने की कहानी
प्रस्तावना : अर्थ, महत्व, जरूरत, उद्देश्य
नागरिकता क्या है? 
विदेशी भारतीय नागरिकता(OCI) क्या है?

No comments